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सविनय अवज्ञा आंदोलन

1929 में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक सम्मेलन हुआ जिसमें संपूर्ण स्वराज की संकल्पना की घोषणा की गई और यह लक्ष्य स्वीकार कर लिया गया तथा 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने राष्ट्रीय आंदोलन के नए चरण की घोषणा की। नया आंदोलन जोकि सविनय अवज्ञा आंदोलन के नाम से जाना जाता है इसे गांधी जी ने अपने 78 समर्थकों के साथ ऐतिहासिक दांडी मार्च से आरंभ किया उन्होंने साबरमती आश्रम से दांडी तक पैदल यात्रा की और गुजरात में समुद्र तटीय गांव में नमक बनाकर या उठाकर कानून का बहिष्कार किया। औपनिवेशिक सरकार ने नमक बनाने पर प्रतिबंध लगा रखा था, इसलिए गांधी जी और उनके सहयोगियों द्वारा नमक बनाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। लाखो लोग घरों से बाहर निकलकर गलियों में आ गए और धरना व प्रदर्शन करने लगे सभी ओर हड़ताले हो गयी थीं विदेशी……….

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भारतीय संसद

भारत में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय सभा को संसद कहा जाता है राज्य स्तर पर इसे विधानसभा कहते हैं अलग-अलग देशों में इनके नाम अलग-अलग हो सकते हैं पर हर लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधियों की सभा होती है यह जनता की ओर से कई तरह से राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करती है किसी भी देश में कानून बनाने का सबसे बड़ा अधिकार संसद को होता है कानून बनाने या विधि निर्माण का यह काम इतना महत्वपूर्ण होता है कि इन सभाओं को विधायिका कहते हैं दुनिया भर की संसदें नए कानून बना सकती हैं मौजूदा कानूनों में संशोधन कर सकती हैं या मौजूदा कानून को खत्म करके उसकी जगह नए कानून को बना सकती हैं हमारे देश में संसद के दो सदन है दोनों सदनों में एक को राज्यसभा और दूसरे को लोकसभा के नाम से जाना जाता है भारत का……….

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भारतीय संविधान के अधिकार

विश्व के अधिकांश दूसरे लोकतंत्र की तरह भारत में भी अधिकार संविधान में दर्ज है हमारे जीवन के लिए बुनियादी रूप से जरूरी अधिकारों को विशेष दर्जा दिया गया है इन्हें मौलिक अधिकार कहा जाता है यह सभी नागरिकों को समानता स्वतंत्रता और न्याय दिलाने की बात कहता है मौलिक अधिकार इन वायदों को व्यवहारिक रूप देते हैं यह अधिकार भारत के संविधान की एक महत्वपूर्ण बुनियादी विशेषता है आइए एक-एक करके सभी मौलिक अधिकारों के बारे में जानते हैं। समानता का अधिकार हमारा संविधान कहता है कि सरकार भारत में किसी व्यक्ति को कानून के सामने समानता या कानून से संरक्षण के मामले में समानता के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती इसका मतलब यह हुआ कि किसी व्यक्ति का दर्जा या पद चाहे जो हो सब पर कानून समान रूप से लागू होता है इसे………..

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भारतीय संविधान का निर्माण

दक्षिण अफ्रीका की तरह भारत का संविधान भी बहुत कठिन परिस्थितियों के बीच बना भारत जैसे विशाल और विविधता भरे देश के लिए संविधान बनाना आसान काम नहीं था भारत के लोग तब गुलाम की हैसियत से निकलकर नागरिक की हैसियत पाने जा रहे थे देश ने धर्म के आधार पर बहुत बंटवारे की विभीषिका झेली थी भारत और पाकिस्तान के लोगों के लिए बटवारा भारी बर्बादी और दहलाने वाला अनुभव था विभाजन से जुड़ी हिंसा में सीमा के दोनों तरफ कम से कम दस लाख लोग मारे जा चुके थे एक बड़ी समस्या और भी थी अंग्रेजों ने देसी रियासतों के शासकों को यह आजादी दे दी थी कि वे भारत या पाकिस्तान जिसमें इच्छा हो अपने रियासत का विलय कर दें या स्वतंत्र रहें इन रियासतों का विलय मुश्किल और अनिश्चय भरा काम था जब संविधान लिखा जा…………

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी इसकी पहली बैठक मुंबई में 28 दिसंबर 1985 में हुई थी इसके प्रथम अध्यक्ष डब्ल्यू सी बनर्जी थे तथा इसमें संपूर्ण भारत से 72 प्रतिनिधि शामिल हुए थे ए. ओ. ह्यूम जो कि एक अंग्रेज थे और भारतीय सिविल सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे उन्होंने इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई यह प्रायः कहा जाता है कि ए ओ ह्यूम नें कांग्रेस की स्थापना करके सेफ्टी वाल्व उपलब्ध कराया था जो ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय जनसाधारण में फैली व्यापकता शांति और हलचल से ध्यान हटा दें। यह दृष्टिकोण इसलिए विश्वसनीयता प्राप्त कर चुका है क्योंकि ए ओ ह्यूम ने स्वयं कहा था कि कांग्रेस की स्थापना आवश्यक है क्योंकि हमारे स्वयं के कार्यों से जन्मी ताकतवर और बढ़ती हुई शक्तियों से बचाव के लिए सेफ्टी वाल्व……….

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भारत छोड़ो आंदोलन

8 अगस्त 1942 का दिन था जब कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा कर दी थी गांधी जी ने लोगों का आह्वान किया और करो या मरो का नारा दिया ब्रिटिश सरकार ने उन सभी नेताओं को जेल भेज दिया जो इस आंदोलन को संगठित रूप से संचालित कर सकते थे परंतु ब्रिटिश शासन के इस दबाव के आगे लोग झुके नहीं और उनमें उत्साह बराबर बना रहा स्थानीय स्तर पर नए नेता उभर कर सामने आ गए थे जिन्होंने इस आंदोलन को जारी रखने का भरसक प्रयास किया इस आंदोलन के रूप में केंद्रीय कमान में कमी आई तथा सरकार ने इस आंदोलन को पूरे बल के साथ दबाने का कार्य आरंभ किया चारों ओर हिंसा भड़क चुकी थी रेलवे स्टेशन और डाकघरों और पुलिस स्टेशनों को आंदोलनकारियों ने जला दिया अनेक क्षेत्रों में समान सरकार स्थापित हो चुकी थी हड़ताल……………..

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भारत का राष्ट्रपति

भारत का राष्ट्रपति ब्रिटेन की महारानी की तरह होता है जिसका काम आलंकारिक अधिक होता है राष्ट्रपति देश की सभी राजनीतिक संस्थाओं के काम की निगरानी करता है ताकि वे राज्य के उद्देश्य को हासिल करने के लिए मिल-जुलकर काम करें। राष्ट्रपति का चयन जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जाता संसद सदस्य और राज्य की विधानसभाओं के सदस्य उसे चुनते हैं राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी को चुनाव जीतने के लिए बहुमत हासिल करना होता है इससे यह तय हो जाता है कि राष्ट्रपति पूरे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है लेकिन राष्ट्रपति उस तरह से प्रत्यक्ष जनादेश का दावा नहीं कर सकता जिस तरह से प्रधानमंत्री। इससे यह तय होता है कि राष्ट्रपति कहने मात्र के लिए कार्यपालिका की भूमिका निभाता है सारी सरकारी गतिविधियां राष्ट्रपति के नाम पर ही होती है सारे कानून और सरकार………..

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भारत का चुनाव अभियान

चुनावों का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी पसंद के प्रतिनिधियों सरकार और नीतियों का चुनाव करने का अवसर देना है इसीलिए कौन प्रतिनिधि बेहतर है कौन पार्टी अच्छी सरकार देगी या अच्छी नीति कौन सी है इस बारे में स्वतंत्र और खुली चर्चा भी बहुत जरूरी है चुनाव अभियान के दौरान ही यही होता है हमारे देश में उम्मीदवारों की अंतिम सूची की घोषणा होने और मतदान की तारीख के बीच आम तौर पर 2 सप्ताह का समय चुनाव प्रचार के लिए दिया जाता है इस अवधि में उम्मीदवार मतदाताओं से संपर्क करते हैं राजनेता चुनावी सभाओं में भाषण देते हैं और राजनीतिक पार्टियां अपने समर्थकों को सक्रिय करती है इस अवधि में अखबार और टीवी चैनलों पर चुनाव से जुड़ी खबरें और बहसें भी होती है पर असल में चुनाव अभियान सिर्फ 2 हफ्ते नहीं चलता राजनीतिक दल चुनाव होने के महीनों पहले से इन की तैयारियां………

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भारत का आधुनिक इतिहास

भारतीय इतिहास का आधुनिक युग अंतिम मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु से आरंभ माना जाता है महान मुगल साम्राज्य क्रमशः अनेक स्वायत्तशासी राज्यों में विकसित हो रहा था तथा ब्रिटिश शक्ति का उत्तरोत्तर विकास हो रहा था इस बीच मराठे पतनोन्मुख मुगलों की राजनीतिक सत्ता के दावेदार के रूप में उभरने का प्रयास कर रहे थे किंतु अंग्रेजों के हाथों वें भी पराजित हुए 18वीं शताब्दी वस्तुतः देश में राजनीतिक उथल-पुथल तथा आर्थिक गतिरोध का युग था समाज में भी अनेक बुराइयां व्याप्त हो गई थी व्यापार एवं राजनीति में अंग्रेज तथा फ्रांसीसी परस्पर कटु प्रतिस्पर्धी थे तीन कर्नाटक के युद्ध में अंग्रेजों की विजय हुई तथा फ्रांसीसियों का भारत में अपने साम्राज्य स्थापित करने का सपना अधूरा रह गया। सन 1757 से 1857 ई. के मध्य अंग्रेज…….

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प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद

भारत में प्रधानमंत्री सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्था है फिर भी प्रधानमंत्री के लिए कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं होता राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करते हैं लेकिन राष्ट्रपति अपनी मर्जी से किसी को प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं कर सकते राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या पार्टियों के गठबंधन के नेता को ही प्रधानमंत्री नियुक्त करता है अगर किसी एक पार्टी या गठबंधन को बहुमत हासिल नहीं होता तो राष्ट्रपति उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करता है जिसे सदन में बहुमत हासिल होने की संभावना होती है प्रधानमंत्री का कार्यकाल तय नहीं होता वह तब तक अपने पद पर रह सकता है जब तक वह पार्टी या गठबंधन का नेता है प्रधानमंत्री को नियुक्त करने के बाद राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर दूसरे मंत्रियों……..